ये डीग्री भी लेलो, ये नौकरी भी लेलो,
भले छीन लो मुझसे USA का विसा
मगर मुझको लौटा दो वो क्वालेज का कन्टीन,
वो चाय का पानी, वो तीखा समोसा..........
कडी धूप मे अपने घर से निकलना,
वो प्रोजेक्ट की खातीर शहर भर भटकना,
वो लेक्चर मे दोस्तों की प्रोक्झी लगाना,
वो सर को चीढाना ,वो एरोप्लेन उडाना,
वो सबमीशन की रातों को जागना जगाना,
वो ओरल्स की कहानी, वो प्रक्टीकल का किस्सा.....
बीमारी का कारण दे के टाईम बढाना,
वो दुसरों के Assignments को अपना बनाना,
वो सेमीनार के दिन पैरो का छटपटाना,
वो WorkShop मे दिन रात पसीना बहाना,
वो Exam के दिन का बेचैन माहौल,
पर वो मा का विश्वास - टीचर का भरोसा.....
वो पेडो के नीचे गप्पे लडाना,
वो रातों मे Assignments Sheets बनाना,
वो Exams के आखरी दिन Theater मे जाना,
वो भोले से फ़्रेशर्स को हमेशा सताना,
Without any reason, Common Off पे जाना,
30/6/09
ये डीग्री भी लेलो, ये नौकरी भी लेलो,
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2/5/09
वह सोना चाहता है लेकिन नींद उसकी नीली आंखों से काफी दूर है...
वह लगातार कई दिनों से सोना चाह रहा था। लेकिन नींद थी, जो आने का नाम ही नहीं ले रही थी। उसकी आंखे तो भारी होती पर हो सो नहीं पाता था। हाथ-पांव के नाखून भी बढ़ चुके थे। इससे नहाने की उम्मीद करना रेत में पानी ढूंढने के समान था।
फिर भी कुछ लोग उससे उम्मीद करते थे अच्छा बनने की। वह जी रहा था। क्यों जी रहा था, यह न उसे पता था और न उसके आसपास के लोगों को। यह अलग बात थी कि उसके आसपास ऐसा कोई नहीं बचा था जिससे वह अपने दिल की बात कर सके।
लेकिन आज से कुछ शताब्दी पहले तक ऐसा नहीं था। बात उस समय की है जब उस शहर में मॉल नहीं आए थे। शॉपिंग साप्ताहिक हॉट में हुआ करती थी। महिलाएं तो सड़क पर ना के बराबर निकलती थीं और सड़कों पर, जहां आज मर्सिडिज और नैनो दौड़ती हैं, वहां सिर्फ ऊंट, हाथी और घोड़े ही थे। शताब्दी बदली तो सबकुछ बदला।
उस जमाने में लोग एक-दूसरे के लिए जीते और मरते थे। आज भी जीते और मरते हैं पर किसके लिए। वह भी किसी के लिए जीना और मरना चाहता था लेकिन यह लंबी दास्तान बन गई। सुना था वह भी किसी के लिए जीती और मरती थी। लेकिन यह क्या अब वह उसके लिए नहीं और किसी के लिए जीने-मरने की बात करने लगी है।
शहर बदल चुका है। लेकिन वह आज भी उसका इंतजार करता है। क्योंकि वह नहीं बदल पाया अपने आपको। वह आज भी जी रहा है पर वह आज सोना चाहता है। वह सोना चाहता है। लेकिन नींद अभी भी उसकी नीली आंखों से काफी दूर है।
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articale कहानी, परुनिशा : एक अनकही दास्तां
6/4/09
एक अजन्मी बेटी का मां के नाम पत्र
मेरी प्यारी मां,
मैं खुश हूं और भगवान से प्रार्थना करती हूं कि आप भी सुखी रहें। यह पत्र मैं इसलिए लिख रही हूं क्योंकि मैंने एक सनसनीखेज खबर सुनी है, जिसे सुनकर मैं सिर से पांव तक कांप उठी। स्नेहमयी मां आपको मेरा कन्या होने का पता लग गया है और मुझ मासूम को जन्म लेने से पहले ही कोख में ही मार डालने की साजिश रची जा रही है। यह सुन मुझे यकीन ही नहीं हुआ भला मेरी प्यारी-प्यारी कोमल हृदया मां ऐसा कैसे कर सकती हे? कोख में पल रही अपनी लाडो के सुकुमार शरीर पर नश्तरों का चुभन एक मां कैसे सह सकती है?
पुण्यशीला मां! बस, आप एक बार कह दीजिए-यह जो कुछ मैंने सुना वह झूठ है। दरअसल, यह सब सुनकर मैं दहल सी गई हूं। मेरे तो हाथ ही इतने सुकोमल हैं कि डॉक्टर के क्लीनिक जाते वक्त आपका आंचल भी जोर से नहीं पकड़ सकती ताकि आपको रोक लूं। मेरी बांह भी इतनी मजबूत नहीं है कि आपके गले से लिपट सकूं।
मधुमयी मां! मुझे मारने के लिए आप जो दवा लेना चाहती हैं, वह मेरे नन्हें शरीर को बहुत कष्ट देगी। स्नेहयमी मां! मुझे बहुत दर्द होगा। आप तो देख भी नहीं पाएंगी कि वह दवाइ्र आपके पेट के अंदर मुझे कितनी मुझे कितनी बेरहमी से मार डालेगी। डाक्टर की हथौड़ी कितनी क्रूरता से
मेरी कोमल खोपड़ी के टुकड़े-टुकड़े कर डालेगी। उनकी कैंची मेरे नाजुक हाथ-पैर को काट डालेगी अगर आप यह दृश्य देखेगी तो ऐसा करने का सोच भी नहीं सकेंगी।
सुखदायिनी मां! मुझे बचाओ..कृपा करो दयामयी मां, मुझे बचाओ..। यह दवा मुझे आपके शरीर से इस तरह फिसला देगी, जैसे गीले हाथों से साबुन की टिकिया। भगवान के लिए ऐसा मत करना। मैं यह पत्र इसलिए लिख रही हूं क्योंकि अभी तो मेरी आवाज भी नहीं निकलती है। कहूं भी तो किससे और कैसे? मुझे जन्म लेने की बहुत ललक है मां! अभी तो आपके आंगन में मुझे नन्हें-नन्हें पैरों से झम-झम नाचना है।
आपकी ममता भरी गोद में खेलना है। चिंता मत करो मां, मैं आप पर बोझ नहीं बनूंगी। मत लाकर देना मुझे पायल..। मैं दीदी की छोटी पड़ चुकी पायल पहन लूंगी। भैया के छोटे पड़ चुके कपड़ों से तन ढक लूंगी। मां! बस एक बार मुझे इस कोख से निकल कर चांद-तारों से भरे आपके आसमान तले जीने का मौका तो दीजिए। मुझे भगवान की मंगलमय सृष्टि का विलास तो देखने दीजिए।
मेरे हाथों पर भी मेहंदी रचेगी, शगुनभरी डोली निकलेगी और आपके आंगन से चिडिया बनकर उड़ जाउंगी। मैं आपका प्यार चाहती हूं। मुझे मत मारिए, अपनी बगल की डाल पर फूल बनकर खिलने दीजिए। मां..। और, क्या कहूं मां..। आखिर तुम मेरी मां हो..
आपकी अजन्मी बेटी
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articale मां
